Sitar Vadan me Bolo ka Nishpadan Evam Chhando-baddha Rachna

Abstract

वर्तमान युग में सितार एक ऐसा तन्त्री वाद्य है जिसमें कल्पना की उड़ान के लिए बड़ी गुंजाइश है. सुमधुर मूल स्वरों के साथ इस वाद्य में कलात्मक प्रस्तुतिकरण की एक अत्यन्त ही सुन्दर अभिव्यक्ति होती है. सितार वादन में कलात्मक प्रस्तुतिकरण हेतु सर्वप्रथम नियमबद्ध बोलों की योजना की गयी. इन्हीं बोलों से अनेक प्रकार की छन्दोबद्ध रचनाओं का निर्माण हुआ. अनेक प्रकार के गत, तान, तोड़े तथा लयकारियों का निर्माण इन्हीं बोलों के आधार पर किया गया है, जिसके द्वारा एक पूर्ण राग की अभिव्यक्ति सितार वादन में सम्भव हो सका. इस शोधपत्र को प्रस्तुत करने का मूल प्रयोजन सितार वादन में कलात्मक प्रस्तुतिकरण हेतु प्रयुक्त विभिन्न बोल एवं इनसे निर्मित छन्दोबद्ध रचनाओं का निरूपण करना है जो सम्पूर्ण राग के स्वरूप को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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Citation

Singh, Ritu. "Sitar Vadan me Bolo ka Nishpadan Evam Chhando-baddha Rachna." Sangeet Galaxy, vol. 11, no. 1, pp. 170-175.

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