भारतीय शास्त्रीय संगीत बच्चों के व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसका गहरा प्रभाव संगीत के दायरे से ले कर सुदूर विषयों तक फैला है, जो बच्चों के विकास के विभिन्न आयामों को प्रभावित करता है. संगीत में निहित भावनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से बच्चों को एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराया जाता है जो रचनात्मकता, अनुशासन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देता है. शास्त्रीय संगीत सीखने और अभ्यास करने से धैर्य, दृढ़ता और समर्पण की भावना पैदा होती है, क्योंकि इसकी जटिलताओं में महारत हासिल करने के लिए लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है. इसके अलावा याद रखने की प्रक्रिया और मौखिक परंपरा संज्ञानात्मक क्षमताओं और स्मृति प्रतिधारण को सुदृढ़ करती हैं. संगीत में निहित अध्यात्म के माध्यम से बच्चों को उनकी भावनाओं को प्रभावी ढंग से समझने और समझाने में मदद मिलती है. जैसे-जैसे बच्चे समूह प्रदर्शन में संलग्न होते हैं और अपने शिक्षकों और साथियों के साथ वार्तालाप करते हैं, वे सहयोग और परस्पर सम्मान का महत्व सीखते हैं. भारतीय शास्त्रीय संगीत, अपने शाश्वत ज्ञान और इसकी कलात्मकता की उच्च कोटि होने के कारण, एक परिवर्तनकारी शक्ति का रूप धारण करता है, जो कलात्मक संवेदनशीलता और व्यक्तिगत विकास के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण के रूप में बच्चों के व्यक्तित्व का पूर्ण पोषण करता है.
Ranjan, Mrinal. "(Bacchon ke Vyaktitva ke Vikas me Bhartiya Shastriya Sangeet ki Bhumika) बच्चों के व्यक्तित्व के विकास में भारतीय शास्त्रीय संगीत की भूमिका." Sangeet Galaxy, vol. 12, no. 2, July 2023, pp. 173-179.