भारतीय दर्शन मूलतः आध्यात्मिक होने के कारण विभिन्न कलाओं और साहित्य पर उसका प्रभाव दृष्टिगत होता है. इस कारण वैदिक काल से ही दर्शन और संगीत का पारस्परिक सम्बन्ध दिखना आरम्भ हो जाता है. वेद मूलतः दार्शनिक ग्रन्थ है किन्तु उनके मन्त्र गेय होने के कारण संगीतमय है. प्रस्तुत शोध पत्र में भारतीय संगीत और साहित्य पर दर्शन के प्रभाव को गायन, वादन एवं नृत्य के सन्दर्भ में रेखांकित करने का प्रयास किया गया है. लौकिक संगीत आहत नाद से उत्पन्न होता है अर्थात द्वैत से उत्पन्न होता है किन्तु अद्वैत की और ले जाने का मार्ग भी वही है. वाद्य संगीत हो या नृत्य सभी की गहन अनुभूति की चरम अवस्था में दार्शनिक व्याख्या की गयी है.
Verma, Amit Kumar. "Bhartiya Sangeet aur Sahitya par Darshan ka Prabhav (Gayan, Vadan evam Nritya ke Pariprekshya me)." Sangeet Galaxy, vol. 10, no. 2, July 2021, pp. 50-54. https://doi.org/10.67585/SG.v10.i2.2021.50-54