भारतीय संगीत अपने प्रत्येक रूप में सदैव आनन्ददायक रहा है. इसमें ध्रुपद , ख्याल, ठुमरी, गज़ल, गीत इत्यादि विविध प्रकार की गायन विधाएं प्रचलित हैं. इन गायन शैलियों को शास्त्रीय संगीत, उपशास्त्रीय संगीत, लोक संगीत एवं सुगम संगीत इत्यादि के अन्तर्गत वर्गीकृत किया गया है. ये विधाएँ दीर्घकाल से ही जनमानस को आनन्दित एवं रंजित करने में सक्षम रही हैं. वर्तमान समय में संगीत की एक और विधा अत्यन्त प्रचलित एवं जनप्रिय हो चुकी है वह है चित्रपट संगीत. वास्तव में चित्रपट संगीत का आधार हमारा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत ही है. चित्रपट संगीत के प्रारम्भिक काल में अधिकांश गीत शास्त्रीय संगीत के आधार पर रचित पाए गए हैं. तानसेन, बसंत बहार, गूंज उठी शहनाई, बैजू बावरा, माधुरी, संगीत सम्राट तानसेन, राग रंग, झनक-झनक पायल बाजे, रानी रूपमती, मुग़ले-आज़म, बावर्ची, लेकिन, सुर-संगम, ममता, आलाप इत्यादि चित्रपट शास्त्रीय संगीत से सुसज्जित हैं. जहाँ एक ओर शास्त्रीय संगीत के रागों एवं तालों का प्रयोग इन गीतों में स्वतन्त्र रूप से किया गया वहीं शास्त्रीय संगीत की समस्त विधाओं ध्रुपद , ख्याल, तराना, रागमाला इत्यादि ने भी चित्रपट गीतों को अलंकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कई चित्रपट गीतों का निर्माण इन गायन शैलियों के आधार पर हुआ तो कहीं इन विधाओं की घरानेदार परम्परागत एवं प्रसिद्ध बंदिशों का सुन्दर प्रयोग भी चित्रपट संगीतकारों द्वारा सफलतापूर्वक किया गया और वर्तमान समय में भी किया जा रहा है. चित्रपट संगीत में शास्त्रीय गायन विधाओं के प्रयोग ने संगीत जिज्ञासुओं के साथ-साथ साधारण संगीत रसिकों को भी आनन्द विभोर किया है. प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य चित्रपट संगीत में शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद एवं ख्याल गायन शैली के प्रयोग का अध्ययन करना है.
Sharma, Reema. "(Chitrapat Sangeet me Dhrupad Evam Khyal Gayan Shailiyon ka Prayog: Ek Avloknatmak Addhyayan) चित्रपट संगीत में ध्रुपद एवं ख्याल गायन शैलियों का प्रयोग: एक अवलोकनात्मक अध्ययन." Sangeet Galaxy, vol. 12, no. 2, 2023, pp. 135-144.