किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति के आधार-स्तंभ हैं उसकी ललित कलाएँ, अर्थात् साहित्य, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला एवं वास्तुकला. इनमे से प्रमुख दो ललित कलाओं, साहित्य और संगीत का समावेश किसी एक विधा में हो, तो ऐसी विधा को ललित कलाओं का सर्वोत्तम संगम माना जाएगा. ऐसी विधा है गीत.
गीत मूलतः काव्य और संगीत के संयोग-समायोजन से उत्पन्न एक चिरन्तर विधा है. आदिकाल से ही मानव अपनी संवेदनाओं और जीवन-संघर्षों को व्यक्त करने के लिये गीत का सहारा लेता रहा है. मनुष्य के सुख-दुःख एवं अन्य सभी प्रकार की अनुभूतियों की अभिव्यक्ति का गिने-चुने शब्दों में स्वर-साधना के अनुरूप चित्रण कर देना ही गीत है. जिस प्रकार उर्दू भाषा में अर्थप्रधान गीत 'गज़ल' की संज्ञा दी जाती है, उसी प्रकार हिंदी में अर्थप्रधान कविता को गीत कहा जाता है.
व्युत्पत्ति की द्रष्टि से गीत शब्द अंग्रेज़ी के लिरिक, लायर शब्द से जुड़ा हुआ है. मूलतः ग्रीक भाषा का लिरिक उस गेय भावसंयुत कविता का बोध कराता है जो लीरा (लूर) नाम की तंत्री-वाद्य के साथ गाई जाती थी. भारतीय संस्कृति में गीत की व्यापकता को देखते हुए उसे विभिन्न पहलुओं से परखने का प्रयास किया गया है.
Srivastav, Shailendra. "Geet : Ek Bahu-aayami Lalit Vidha." Sangeet Galaxy, January 2018, pp. 52-57.