Lupt Hoti Bundelkhand Ki Lok Vidhaein

Abstract

भारत देश, विश्व का वह भू-भाग है, जहाँ पग-पग पर सांस्कृतिक भिन्नता पायी जाती है। अपनी सांस्कृतिक बाहुल्य के कारण ही इसने सभ्यता के अतिप्राचीन काल से ही विश्व में आदरपूर्ण स्थान प्राप्त किया। इसी सांस्कृतिक विविधता का एक मुख्य अंग लोकगायन परम्परा है। हर क्षेत्र में प्रायः अपनी-अपनी लोकगायन विधायें प्राचीनकाल से ही परिपोषित हुई हैं जिसका एक रंग बुन्देलखण्ड की लोकगायन शैली है। बुन्देलखण्ड में लोक संगीत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में आज भी विद्यमान है, परन्तु बदलते परिवेश के कारण लोक संगीत की प्रतिष्ठा खतरे में है। इसकी वजह लोक कलाओं को संरक्षण न मिलना है। इसके लिये दोषी कोई भी हो परन्तु यदि आज भी इन लोक कलाओं को संरक्षण नहीं मिला तो इनका अस्तित्व सिर्फ पुस्तकों में मिलेगा व्यवहारिक तौर पर नहीं। बुन्देलखण्ड में अनेक लोकगीत की विधायें यथा - संस्कार गीत, यज्ञोपवीत, विवाह गीत, ऋतुगीत, श्रमगीत, जातीय गीत का प्रचलन रहा है। परन्तु वर्तमान में ज्यादातर लोक विधाएं पाश्चात्य संगीत के सामने दम तोड़ रही हैं।

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Citation

Shukla, Alok. "Lupt Hoti Bundelkhand Ki Lok Vidhaein." Sangeet Galaxy, April 2013, pp. 1-4.

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