भारतीय संगीत वाड्मय में सौन्दर्यतत्व संगीत का सारतत्व है। संगीत का मुख्य उद्देश्य सौन्दर्य एवं आनंद का निर्माण करना है। संगीत में रसानुभूति तथा सौन्दर्यबोध दोनों का अर्थ एवं उद्देश्य समान है। मनुष्य के ह्नदय में स्थायी भाव सदैव विद्यमान होते हैं, उन भावों के उद्दीपन से ही रस उत्पन्न होता है और इस रस से कलाजन्य सौन्दर्य की अभिव्यक्ति होती है। संगीत के सौदर्न्यशक्ति के द्वारा प्राणी के स्थायी भावों को जगाकर उसे रसमग्न कर देना कलाकार का लक्ष्य होता है। रस का परिपाक, सिद्ध कलाकार की प्रवीणता का परिचायक होता है। संगीत का सौन्दर्य राग, ताल, लय एवं गीत के अलावा काकुभेद पर भी निर्भर है।
P, Vipul and ay. "Sangeet Me Taal Ke Sahyog Se Rasabhivyakti." Sangeet Galaxy, January 2017, pp. 48-51.