प्राचीनकाल से ही विद्वानों द्वारा वाद्यों को वर्गीकृत करने का प्रयास किया जाता रहा है। समय-समय पर विभिन्न विचारकों द्वारा अपनी दृष्टि से विभिन्न वर्गीकरण भी प्रस्तुत किये जाते रहे हैं।
किन्तु कई वाद्य ऐसे भी निर्मित हो चुके हैं जिनका चार वर्गों के मूल सिद्धान्तों से सामंजस्य नहीं बैठता। फिर भी हम किसी न किसी लक्षण के आधार पर इन्हीं चार वाद्यों को वर्गीकृत करना चाहें, तो हमें अवश्य ही समस्या होगी। यद्यपि भारतीय संगीत के इतिहास में नए वाद्यों के उपयुक्त नए वर्गीकरण के लिए भी प्रयास किये गये, किन्तु उन्हें अधिक महत्ता नहीं प्रदान की गयी।1 वाद्यों की संख्या में पूर्व समय से प्रचुर मात्रा में वृद्धि हुई है। विभिन्न वाद्यों की वादन विधि में भी परिवर्तन हुए हैं। चूँकि, विषय शास्त्रीय वाद्यों पर आधारित है, इसलिए मेरा प्रयास उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत वाद्यों को वर्गीकृत करने का रहेगा।
Gupta, Ruchi Rani. "Vartman Pariprekshya me Vadyo ke Naveen Vargikaran ki Aavashyakta." Sangeet Galaxy, July 2015, pp. 30-32.